In 5 Karno ki wajah se Silent log Jyada successful kyun kote hai
दोस्तों एक बार एक क्लास में टीचर ने सभी स्टुडेंट्स को अलग-अलग टॉपिक पढ़ने को दिए और कहा कि हर स्टूडेंट को क्लास रूम में सामने खड़े होकर अपना टॉपिक समझाना है। अगले दिन सभी बच्चों ने अपने टॉपिक को अच्छे से समझाया! जिनमें से सिर्फ एक बच्चा ऐसा भी था जो बाकी बच्चों के बातों को अच्छे से सुन रहा था, उनके नोट बना रहा था। मगर जब उसकी बारी आई तो वह खड़ा ही नहीं हुआ उसने टीचर को बोला कि उसने किसी भी टॉपिक पर पढ़ाई नहीं करिए, तो इस वजह से टीचर ने उसे बहुत डांटा और पूरी क्लास के सामने उसकी इंसल्ट कर दी और क्लास के बाद टीचर ने घोषित किया की जितने भी टॉपिक्स है कल सभी टॉपिक्स को रिटन टेस्ट होगा।
अगले दिन जब सबका राइटिंग टेस्ट हुआ तो उस बच्चे ने जिसे कल टीचर ने बहुत डांटा था उसने सबसे पहले अपने टेस्ट पेपर टीचर को भरके दे दिया अब टीचर ने तुरंत उसका टेस्ट पेपर चेक करा और सरप्राइजिंगली उसे टेस्ट में फुल मार्क्स भी मिले! इससे टीचर बहुत हैरान हो गई। और उसी स्टूडेंट्स से पूछा कि तुम यह कैसे कराया जिसके जवाब में उसने कहा मैम जब बाकी लोग अपने टॉपिक एक्सप्लेन कर रहे थे तो मैं उन्हें बहुत अच्छे से सुन रहा था तो मुझे याद हो गए। टीचर ने उससे पूछा तुमने कल कितने घंटे पढ़ाई करी थी उसने रिप्लाई करते हुए कहा मैं 10 मिनट।
अब बाकि सभी बच्चों के टेस्ट पेपर चेक करने के बाद टीचर को यह पता चला कि बाकी बच्चों ने इस टेस्ट के लिए तीन-चार घंटे पढ़ाई करी थी! फिर भी वो अच्छे से सभी टॉपिक्स को एक्सप्लेन नहीं कर पाए थे जितना उस बच्चे ने कहा था। तो दोस्तों यह होता है साइलेंस का पावर। लोगों को लगता है कि ज्यादा से ज्यादा बात है किसी भी बात को ज्यादा समझाकर एक्सप्लेन करके वह लोगों का अटेन्शन उनकी तरफ खींच सकता है! मगर ज्यादातर टाइम वह अपनी एनर्जी वेस्ट कर रहे होते हैं! सामने वाले को अपने बारे में जरूरत से ज्यादा इंफॉर्मेशन दे रहे होते हैं अपने सीक्रेट पता रहे होते हैं।
असल में दोस्तों पिछले हजारों सालों से कई महान लोग द पॉवर साइलेंस की प्रैक्टिस करते आ रहे हैं। जिस वजह से वह बाकी लोगों से अलग बन पाते हैं और साइलेंट यानि कि चुप रहने को ऐसे अपनी सबसे बड़ी पॉवर मानते हैं।

तो इसीलिए दोस्तों आज हम आपको Susan cain की बुक Quite से सिखाएंगे कि कैसे आप द पावर ऑफ साइंस का इस्तेमाल करके दूसरों पर अपना इनफ्लुएंस और अथॉरिटी बढ़ा सकते हो क्योंकि साइलेंस प्रैक्टिस करने के कई सारे benefits है जैसे कि,
१. you appear more powerful: Louis XIV की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि उनके सहकर्मचारी कोई भी बुरी खबर देने से बहोत डरते थे। जब की वो ना ही गुस्सा करते थे ना ही किसी को डाटते थे, बस कोई भी बुरी खबर सुनने के बाद वह बस बोलते थे “I shall See”. याने मैं देख लूंगा और कुछ देर तक साइलेंट ही रहते थे। जो उनके साथ के लोगों को डर में डालते थे उन्हें नहीं पता होता कि वह कैसे रिस्पोंड करेंगे या उनके दिमाग में क्या चल रहा है। क्योंकि Louis XIV अपने टाइम के मोस्ट पावरफुल पर्सन थे और साइलेंसर उनकी पावर कि फाउंडेशन थी।
अब आप कोई बड़े किंग तो कि नहीं हो, पर आप भी साइलेंस का यूज करके ज्यादा पावरफुल देख सकते हो, क्योंकि पावरफुल लोग हमेशा कम बोलते है आप जितना ज्यादा बोलोगे इतने ज्यादा चांसेस है कि आप अपना मजाक बना लोगे अगर आप ज्यादा साइलेंट रहोगे और जब भी अपनी बात बोलोगे तो आपके हाथों में ज्यादा मीनिंग, वजह और महत्व होगा और क्योंकि आप बहुत कम बोलते हो तो जब आप बोलोगे तो लोग आपकी बातों को बहुत ध्यान से सुनेंगे। जब लोग आपका अनप्रिडिक्टेबल और मिस्टीरियस नेचर नहीं समझ पाएंगे तो वह आपको और जानना चाहेंगे।
२. People will love talking to you when you don’t talk: एक बार ऑथर एक डिनर पार्टी में गई थी जहां वह किसी से मिली जिसे वह नहीं जानते थी, जो बस बात करें जा रहा था और और तभी ऑथर भी उसकी बातों को अच्छे से सुन रही थी। वह खुद कुछ नहीं बोल रही थी बस सामने वाले को सुन रही थी। पर डिनर खत्म होने के बाद उस पर समय पार्टी के होस्ट जाकर कहा कि “Susan is One of the best conversationalist”, जबकि वो जब बात कर सकते थे तब susan का पार्ट बस सुनने का था। आप भी इसका यूज कर सकते हो लोग चाहते हैं कि कोई उन्हें सुने और समझे इसीलिए जब silently लोगों को बात करते हो सकते हो तो उससे उन्हें यह दोनों चीजें मिल जाती हैं अब चाहिए आपको उनकी बात समझ नहीं आ रही हो या आप उन्हें करेक्ट करना चाहते हो उन्हें अपने बारे में कुछ बताना चाहते हो पर यह सब न करके आप उन्हें बोलने देते हो तो इससे सामने वाले को ऐसा फील होता है कि वह बात करने में अच्छा है। और आपके presence से वो खुद अपने बारे में अच्छा फील करने लगता है जो सच में बहुत पावरफुल है।
३. Silence Make you more creative: अल्बर्ट आइंस्टाइन को हम सब जानते हैं कि वह कितने बड़े जीनियस थे लेकिन साथ ही वे के इंट्रोवर्ट थे, जो अकेले रहना ज्यादा पसंद करते थे और उन्होंने बताया था उनके इस क्रिएटिव माइंड रिसन भी यही था कि वे क्वाइट और शांत लाइफ जीते थे।

आइंस्टाइन का एक बहोत ही अंडररेटेड quote है “The monotony and solitude of a quiet life stimulates the creative mind” इसीलिए इस बुक की ऑथर susan कहती हैं जो लोग सॉलिट्यूड और साइलेंस प्रैक्टिस नहीं करते, जिन्हें ग्रुप में काम करना ज्यादा पसंद है, collaborate करना ज्यादा पसंद है, वह अपने रिस्पेक्टिव काम में नो डाउट बहुत अच्छा परफॉर्म कर रहे होते हैं पर ग्रुप और लोगों के एनवायरनमेंट में लिमिट हो जाता है जो सब कर रहे होते हैं उसी पेस के अकॉर्डिंग वह भी काम कर रहे होते हैं, जिससे कि वहां के लोगों के साथ कनेक्टेड होने की वजह से अपनी खुद की induvial लिमिट पुश नहीं कर पते है वहीं सॉलिट्यूड और साइलेंस प्रैक्टिस करने वाले लोग अच्छे से सोच पाते हैं और वह क्रिएटिव और इनोवेटिव भी होते हैं।
४. You will learn to read people: दोस्तों आपने कभी सोचा है जब हम किसी से बात कर रहे हो मैं तो हमारे माइंड में क्या चल रहा होता है? उस वक्त हम सामने वाले की बात को सुन पा रहे होते है उसे समझ भी पा रहे होते हैं उनकी बातों का अपने माइंड में सेंस बनाने की कोशिश भी करते हैं लेकिन साथ ही उससे भी ज्यादा हम अपने दिमाग में अपना जवाब तैयार कर रहे होते हैं! हम यह सोच रहे होते हैं कि हम यह सोच रहे होते है की हम उनकी बातों का क्या बेस्ट रिप्लाई दे जिससे हम ज्यादा बैटर, स्मार्ट और पावरफुल शो हो सके। मगर आप ज्यादा साइलेंट रहते हो तो आप लोगों को और अच्छे से observe करने लगते हो क्योंकि अब आपका दिमाग यह नहीं सोचता कि क्या बोलना है बल्कि इस एनर्जी का यूज करके वह सामने वाले की बॉडी लैंग्वेज उनके फैसियल एक्सप्रेशंस और ओवरऑल surrounding पर ज्यादा फोकस करता है और इस ऐटिटूड को अप्लाई करने के कुछ टाइम बाद ही आप झूठे लोगों को आसानी से पकड़ लेते हो अगर कोई आपका फायदा उठाना चाह रहा होता है तो आप पहले ही समझ जाते हो और आपको जो भी इंफोर्मेशन मिल रही होती हैं आप उसे अपने अकॉर्डिंग अच्छे से यूज कर सकते हो।
५. ONCE THE WORDS ARE OUT YOU CAN’T TAKE THEM BACK: आप कभी कुछ ऐसा नहीं कहना चाहिए कि इसके बाद आपको रिग्रेट और पछतावा ना हो और साइलेंसर सेल्फ कंट्रोल मेंटेन करने का सबसे बेस्ट वे है। कई बार आपसे सुपीरियर लोग आपको बहुत गलत तरीके से ठीक करते है और आप उन्हें बहुत कुछ बोलना चाहोगे उन्हें सुनाने के बाद आप थोड़ा सेटिस्फाइड फील करते हो पर आप खुद सोचो क्या वह worth it होगा? अगर कोई आपसे इस रिस्पेक्टफुली बिहेव कर रहा है तो क्या उनसे लड़के या उन्हें कुछ बोलने से आप अपने रिस्पेक्ट ओं आप घुमा सकते हो नहीं ना?
Serving your ego only takes you further away from the things you want in your life. इसीलिए बजाय अपने इमोशंस में आकर कुछ भी बोलने के make sure करो कि आपके पास हर बात का एक बेटर रिस्पांस हो। अगर आपसे कोई बहुत गलत तरह बिहेव कर रहा है तब भी अपने इमोशंस में आकर उसे कुछ भी बोलने या लड़ने के बजाय उसे सिचुएशन को अच्छे से समझो और सोचो कि आपको क्या बोलना चाहिए जिससे कि सामने वाले को अपनी मिस्टेक का रियलाइजेशन हो और वह आपके रिस्पेक्ट भी करें पर फिर भी कोई आपसे बहुत बुरी तरह behave करता है तो आपको इम्मीडिएटली उनसे कट ऑफ कर लेना चाहिए।
दोस्तों मैं आशा करता हूँ आपको कुछ आज नया सिखने को मिला होगा। अगर आपके कुछ doubts हो तो निचे कमेंट मैं जरूर बताइये।
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