hindu calendar months In Hindi-हिन्दू कैलेंडर के महीनों के नाम और महत्व

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hindu calendar months in hindi:-भारत में प्राचीन समय से हिंदु कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता हैं | महिना समय की एक इकाई होता है ,जिसका उपयोग कैलेंडर के साथ किया जाता है | भारत में शुरू में पंचांग के कैलेंडर आते थे,,

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लेकिन अब अलग-अलग भाषाओ में  बंगाली कैलेंडर, ओड़िया, मलयालम, पंजाबी , तमिल, कन्नड़, तुलु है, जो महाराष्ट्र, तेलांगना, कर्नाटका, आंध्रप्रदेश में कैलेंडर आने लगें | हिंदु कैलेंडर बहुत से रूपों में है लेकिन मानक संस्करण  “साका कैलेंडर ” को भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर का दर्जा प्राप्त है |

hindu calendar months:सबसे पहला कैलेंडर खगोलीय दर्शन और चन्द्र मास  के आधार पर बनाया गया था , वर्ष 1957 में हिंदु कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए साका कैलेंडर भी बना था | इस कैलेंडर में अंग्रेजी के लिप ईयर को भी जोड़ा गया है जिसे अधिक मास कहते है  इन कैलंडर में प्रमुख धार्मिक त्यौहार , पूजा पाठ , छुट्टिया , और पुरे वर्ष में होने वाले समारोह के बारे में बताया गया |

हिन्दू कैलेंडर के महीनों के नाम व उनके सामान अंग्रेजी महीने  (hindu calendar months in hindi)

हिंदु कलेंडर में अंग्रेजी भी अंग्रेजी महीनों की तरह बारह (12 ) महीने है जिसमे 29.5 दिन हर महीने में होते है |

क्र.सं अंग्रेजी मास हिंदी मास
1 मार्च-अप्रैल चैत्र मास
2 अप्रैल-मई वैशाख मास
3 मई-जून ज्येष्ठ मास
4 जून-जुलाई आसाढ़ मास
5 जुलाई-अगस्त श्रावण मास
6 अगस्त-सितम्बर भाद्रपक्ष मास
7 सितम्बर-अक्टुम्बर अश्विनी मास
8 अक्टुम्बर-नवम्बर कार्तिक मास
9 नवम्बर-दिसम्बर मार्गशीष मास
10 दिसम्बर-जनवरी पोंष मास
11 जनवरी-फ़रवरी माघ मास
12 फ़रवरी-मार्च फाल्गुन मास

 



हिंदु पंचांग की समय गणना के अनुसार साल में छ: (6) ऋतुए होती है |

  1. बसंत ऋतू                         2. ग्रीष्म ऋतू                          3. वर्षा ऋतू

4. शरद ऋतू                         5.हेमंत ऋतू                            6.शिशिर ऋतू /शीत ऋतू

1.चैत्र  मास (मेष राशी) – ये हिंदु कैलेंडर का पहला महिना होता है यही से ग्रीष्म ऋतू की शुरुआत होती है यह महिना अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च-अप्रैल महीने में आता है | नेपाली और बंगाली कलेंडर के अनुसार यह महिना आखिरी होता है | इन महीनो में हम होली का त्योंहार , चैत्र के नवरात्रे, इन्ही नवरात्रों के नवे दिन रामनवमी का त्योंहार मनाया जाता है , वहीं महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का त्योंहार , तमिलनाडु में चैत्री विशु और कर्नाटका एवं आंध्रप्रदेश में उगडी का त्योंहार मनाया जाता है |

2.बैसाख मास  (वृषभ राशी ) –ये हिंदु कलेंडर का दूसरा महिना है ये अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार अप्रैल महीनें में आता हैं |लेकिन पंजाबी, बंगाली और नेपाली कलेंडर में ये पहला महिना होता है | सूर्य की स्तिथी विशाखा नक्षत्र (तारा ) के पास होने के कारण इस महीने का नाम बैसाख मास पड़ा | मान्यता है कि बैसाख के महीने में पूजा आराधना कर के जीवन की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है क्योंकि ..

बैसाख के महीने में भगवान विष्णु के इन अवतारों की जयंती मनाई जाती है , जिसमे  नर-नारायण, भगवान परशुराम, नृसिंह अवतार और ह्यग्रीय अवतार और माता सीता का जन्म भी इसी वैशाख मास में हुआ था। इसी समय “बुध पूर्णिमा ” मनायी जाती है | क्योंकि इसी महीने और इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म माना जाता हैं | ये अधिकतर मई में आने वाली पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | इसी तरह पंजाब में लोग फसल कटाई का पर्व “बैसाखी ” इसी महीने में मनाते है | बैसाख आने पर बंगाल में नयी साल मनायी जाती है और पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में लोग नये काम की शुरुआत करते है |



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3.ज्येष्ठ मास (मिथुन राशी ) –यह साल का तीसरा महिना होता है ये मई-जून में आता हैं और बहुत गर्मी लेके आता है | इस महीने की दोपहर को लोग जेठ की दोपहरी कहते है | इसे तमिल भाषा में अणि मास कहा जाता हैं | इसी महीने में जल देवता की पूजा की जाती हैं और जल बचाने को महत्व दिया जाता है और इसी को लेकर दो त्योंहार मनाये जाते है पहला गंगा दशहरा और दूसरा निर्जला एकादशी | इसी महीने में भगवान हनुमानजी और भगवान राम का मिलन होता हैं इसी महीने में भगवान राम जी के साथ हनुमानजी की पूजा करना शुभ फलदायी होता है |

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वैट सावित्री और वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है | जग्गनाथ-पूरी  में स्नान यात्रा त्यौहार जयेष्ट पूर्णिमा के दिन मनाते है,इस दिन जगन्नाथ मंदिर से बालभद्र, सुभद्रा, जगन्नाथ को मंदिर से बाहर ले जाकर स्नान बेदी में स्नान कराया जाता है.

4.आसाढ़ मास (कर्क राशी )- यह चेत्र मास से शुरू होने वाला साल का चौथा महिना होता है जो जून-जुलाई में पड़ता हैं | इसे वर्षा ऋतू का महिना भी कहा जाता है क्योकि इस महीने में वर्षा ऋतू का आगमन हो जाता हैं | ज्येष्ठ मास में गर्मी झेलने के बाद इस महीने में कुछ राहत मिलती है |

इसी मास के आखिर में हिंदु मान्यताओ के अनुसार सभी देवी-देवता विश्राम करने (सो जाना आम भाषा में ) के लिए चले जाते है |

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5.श्रावण मास (सिंह राशी )-  यह साल का पांचवा महिना होता है जो की हिंदु मान्यताओ के अनुसार बहुत ही पवित्र माना जाता है यह महिना भगवान शिवजी की बहुत प्रिय है और यह जुलाई-अगस्त महीने में आता हैं |

जब सूर्य सिंह राशी में प्रवेश करता हैं तब इस महीने की शुरआत होती हैं , इस मास में कई लोग पुरे श्रावण मास उपवास रखते है तो कुछ लोग हर श्रावण मास के सोमवार का व्रत रखते हैं |श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षा-बंधन का त्योंहार मनाया जाता हैं पूर्णिमा के आठवे दिन जन्माष्टमी का त्योंहार मनाया जाता है

इसी मास में किसान भाइयो द्वारा पोला त्योंहार मनाया जाता हैं , श्रावण मास में नागपंचमी का त्योंहार मनाया जाता हैं | श्रावण मास में ही हरियाली तीज,हरियाली अमावश्या मनायी जाती हैं |देश में धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं लोगों द्वारा कावड़ यात्रा निकाली जाती हैं | जिसमे सीकर जिले का खाटूश्याम जी मंदिर प्रसिद्ध है यहाँ पर लोग इस मास में दूर-दूर से कावड यात्रा लेके आते है और भगवान खाटूश्याम की पूजा करते हैं |




6.भाद्रपद मास (कन्या राशी) –यह साल का छठा महिना होता है जो अगस्त-सितम्बर महीने में आता है इस महीने के शुरू में गणेश चतुर्थी और ऋषि-पंचमी मनायी जाती है | आठवे दिन राधा-अष्टमी एवं चोदश के दिन अनंत चतुर्दशी मनायी जाती है उसके बाद पंद्र्व्हे दिन पितृ पक्ष शुरू होते है जिसमे पितरो का तर्पण किया जाता है |

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7.अश्विन मास (तुला राशी)- यह साल का सातवा महिना होता है जो सितम्बर-अक्टुम्बर महीने में आता हैं | भाद्र-पक्ष की अमावस्या के बाद ये महिना शुरू होता है इसी महीने में शरद नवरात्रे शुरू होते है मास की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनायी जाती है आठवे दिन महाअष्टिमी , नवे दिन महानवमी/दुर्गानवमी और दशवे दिन विजयादशमी को दशहरा मनाया जाता है |ग्यारहवे दिन पपकुंशा एकादशी फिर दिवाली, धनतेरस और  काली पूजा इसी महीने में आते है |

8.कार्तिक मास (वृश्चिक राशी ) –यह साल का आठवां महिना होता हैं जो की अक्टुम्बर-नवम्बर महीने में आता हैं | गुजरात में यह पहला महिना होता है | इसी मास में गोवेर्धन पूजा,भाई दूज और कार्तिक पूर्णिमा आती है | इसी मास में देव विश्राम करके उठ जाते है जिसे देव उठनी ग्यारस कहा जाता है इसी दिन तुलसी-विवाह भी मनाया जाता हैं | इस दिन के बाद शुभ कार्यो (विवाह, नया घर मुह्रुत , गृह प्रवेश,) की शुरआत हो जाती हैं | इसी मास में गुरु-नानक जयंती भी मनायी जाती हैं |

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9.मार्गशीष मास (धनु राशि )- यह साल का नोवा महिना होता है जो की नवम्बर-दिसम्बर महीने में आता है इसी महीने मोक्ष एकादशी भी मनायी जाती है |

10.पौष मास (मकर राशि) – यह साल का दशवा महिना होता है जो दिसम्बर-जनवरी में आता है इस मास में बहुत  ठण्ड पडती है | इसी मास में सूर्य मकर राशी में प्रवेश करता है | इसी महीने मकर-सक्रांति , पंजाब में लोहड़ी और तमिल के लोग पोंगल उत्सव  मनाते हैं |

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11.माघ मास  (कुंभ राशि) –यह साल का ग्यारहवा महिना होता है जो की जनवरी-फ़रवरी में आता है | इस महीने सूर्य कुम्भ राशी में प्रवेश करता है | इसी महीने बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा की जाती हैं , महा-शिवरात्रि और उतर भारत में माघ का उत्सव और मेला भरता है |

12.फाल्गुन मास  (मीन राशि) –यह साल का बाहरवा महिना होता है जो की फ़रवरी-मार्च में आता है | इस महीने सूर्य मीन राशी में प्रवेश करता है | इसी महीने फाल्गुन पूर्णिमा को होली का त्योंहार मनाया जाता हैं |



hindu calendar months in hindi (निष्कर्ष):

इन सभी मास  का हमारे जीवन में बहुत महत्व है पूजा पाठ से लेकर हमारे सरकारी परीक्षा में पूछे जाने वाले हर प्रकार से इनका महत्व है | आशा करता हूँ आपको हमारे द्वारा दी हुई जानकारी पसंद आएगी | आके सुझाव हमे कमेंट करके जरुर बताये |

आशा करता हूँ की आपको ये जानकारी hindu calendar months in hindi बहुत पसंद आयी होगी | आपको ये पोस्ट केसी लगी कृपया आपके सुझाव कमेंट बॉक्स में जरुर देवे |

धन्यवाद

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