Gita Updesh In Hindi | गीता उपदेश इन हिंदी | गीता के उपदेश इन हिंदी

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हेल्लो दोस्त, आज हम लेकर आये है आपके लिए साक्षात् भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कही हुई श्रीमद भगवतगीता के कुछ श्लोक का हिंदी अर्थ (Gita updesh in hindi,geeta gyan in hindi,Bhagavad gita Quotes in hindi) ,जिन्हें पढ़कर आप जीवन में परिवर्तन ला सकते हो..

श्रीमद भगवतगीता हिन्दू महाकाव्य “महाभारत ” का एक हिस्सा है , इसमें 18 अध्याय और 700 संस्कृत श्लोक है , जिसमे भगवान श्री कृष्ण ने हमारी सभी समस्याओ का उत्तर दिया है , इनमे से कुछ हम आपके साथ साझा कर रहे है 

“हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे,
हरे कृष्णा हरे कृष्णा ,कृष्ण कृष्ण हरे हरे”



श्रीमद भगवतगीता का एक-एक शब्द हमारे जीवन के लिए उपयोगी साबित होता है ,और यह मानव कल्याण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है..

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आइये शुरू करते है :-Bhagavad Gita updesh in hindi

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Gita updesh in hindi
Gita updesh in hindi

” हे अर्जुन !

 

जो कोई भी, जिस किसी भी..

देवता की पूजा, विश्वास के साथ करने की इच्छा रखता है..

मैं उसका विश्वास ,उसी देवता में दृढ कर देता हूँ “

Bhagwat geeta in hindi

” हे अर्जुन !

 

“सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए..

प्रसन्नता !  ना इस लोक में है, ना ही कहीं और “

krishna quotes in hindi

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” तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो..

तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया..

तुमने क्या पैदा किया था, जो नष्ट हो गया..

तुमने जो लिया, यहीं से लिया..

जो दिया ,यहीं पर दिया..

जो आज तुम्हारा है,,कल किसी और का होगा..

क्योंकि,, परिवर्तन ही संसार का नियम है “

Geeta saar

” क्रोध से भ्रम  पैदा होता है..

भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है..

जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है..

जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है “

shrimad bhagwat geeta

” नरक के तीन द्वार होते है..

 

क्रोध,वासना और लालच “

geeta shlok

” मन की गतिविधियों..

होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से

भगवान की शक्ति ,सदा तुम्हारे साथ है..

और लगातार तुम्हे बस एक..

साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है “

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Gita updesh in hindi
Gita updesh in hindi

” हे अर्जुन !

 

मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ..

मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ..

सभी जीवित प्राणियों का जीवन और..

सन्यासियों का आत्मसंयम भी मैं ही हूँ “

bhagavad gita slokas

” स्वर्ग  प्राप्त  करने  और ..

वहाँ कई  वर्षों  तक  वास  करने  के  पश्चात ..

एक  असफल  योगी  का  पुन:  ..

 एक  पवित्र  और  समृद्ध  कुटुंब  में  जन्म  होता  है “

geeta quotes in hindi

” जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है..

उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को “

Bhagavad gita updesh in hindi 

” ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को..

एक रूप में देखता है..

वही सही मायने में  देखता है “

shrimad bhagwat geeta in hindi

” जो मन को नियंत्रित नहीं करते..

उनके लिए वह..

शत्रु के समान कार्य करता है “

” मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना..

लोभ-लालच बिना एवं निस्वार्थ और निष्पक्ष होकर..

अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए “

” अपने अनिवार्य कार्य करो..

क्योंकि..

वास्तव में कार्य करना ,निष्क्रियता से बेहतर है “

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Gita updesh in hindi
gita updesh in hindi

” हे अर्जुन !

 

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है..

जैसा वो विश्वास करता है, वैसा वो बन जाता है “

” हे अर्जुन !

 

“आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर..

अपने ह्रदय से, अज्ञान के संदेह को अलग कर दो..

अनुशाषित रहो, उठो “

” मनुष्य को जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए

और ना ही भाग्य और ईश्वर की इच्छा..

जैसे बहानों का प्रयोग करना चाहिए “

” कर्म के बिना फल की अभिलाषा करना..

व्यक्ति की सबसे बड़ी मूर्खता है “



” मनुष्य को अपने कर्मों के संभावित परिणामों से..

प्राप्त होने वाली विजय या पराजय, लाभ या हानि, प्रसन्नता या दुःख..

इत्यादि के बारे में सोच कर चिंता से ग्रसित नहीं होना चाहिए “

“अपकीर्ति ..

मृत्यु से भी बुरी है “

सफलता जिस ताले में बंद रहती है..

वह दो चाबियों से खुलती है..

एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ संकल्प  “

” जो खाने, सोने, आमोद-प्रमोद तथा काम करने की आदतों में नियमित रहता है..

वह योगाभ्यास द्वारा समस्त भौतिक क्लेशों को नष्ट कर सकता है “

Bhagavad gita updesh in hindi

” मनुष्य का मन..

 

इन्द्रियों के चक्रव्यूह के कारण भ्रमित रहता है..

जो वासना, लालच, आलस्य जैसी बुरी आदतों से ग्रसित हो जाता है..

इसलिए मनुष्य का अपने मन एवं आत्मा पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए “

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Gita updesh in hindi
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” मानव कल्याण ही, भगवत गीता का प्रमुख उद्देश्य है..

इसलिए मनुष्य को ,अपने कर्तव्यों का पालन करते समय..

मानव कल्याण को ,प्राथमिकता देना चाहिए “

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” मनुष्य को अपने धर्म के अनुसार कर्म करना चाहिए..

जैसे:- विद्यार्थी का धर्म ,विद्या प्राप्त करना..

सैनिक का धर्म, देश की रक्षा करना आदि..

जिस मानव का जो कर्तव्य है उसे वह कर्तव्य पूर्ण करना चाहिए “

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” मैं भूतकाल, वर्तमान और भविष्य काल के सभी जीवों को जानता हूँ ,

लेकिन वास्तविकता में, मुझे कोई नही जानता है “

समय से पहले और भाग्य से अधिक..

कभी किसी को कुछ नही मिलता है “



” जो मनुष्य जिस प्रकार से ईश्वर का स्मरण करता है..

उसी के अनुसार ईश्वर उसे फल देते हैं..

कंस ने, श्रीकृष्ण को सदैव, मृत्यु के लिए स्मरण किया तो..

श्रीकृष्ण ने भी, कंस को मृत्यु प्रदान की..

अतः ईश्वर को उसी रूप में स्मरण करना चाहिए..

जिस रूप में मानव उन्हें पाना चाहता है। “

” श्रेष्ठ पुरुष को सदैव ..

अपने पद और गरिमा के अनुरूप कार्य करने चाहिए..

क्योंकि..

श्रेष्ठ पुरुष जैसा व्यवहार करेंगे..

तो इन्हीं आदर्शों के अनुरूप सामान्य पुरुष भी..

वैसा ही व्यवहार करेंगे “

” व्यक्ति जो चाहे बन सकता है..

यदी वह विश्वास के साथ..

इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे “

” हे महाबाहो !

 

नि:सन्देह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है।

लेकिन, हे कुन्तीपुत्र !

उसे अभ्यास और वैराग्य के द्वारा वश में किया जा सकता है “

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gita updesh in hindi
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” ऐसा  कुछ  भी  नहीं इस जगत में ..

चेतन  या  अवचेतन..

जो  मेरे  बिना..

अस्तित्व  में  रह  सकता  हो “

” कोई भी इंसान..

जन्म से नहीं, बल्कि..

अपने कर्मो से महान बनता है “

” वह  जो  इस  ज्ञान  में  विश्वास  नहीं  रखत..

मुझे  प्राप्त  किये  बिना  ..

जन्म-मरण के चक्र का अनुगमन करते  हैं “

” अच्छे कर्म करने के बावजूद भी लोग..

केवल आपकी बुराइयाँ ही याद रखेंगे..

इसलिए लोग क्या कहते हैं ..

इस पर ध्यान मत दो..

तुम अपना कर्म करते रहो “



” केवल मन  ही ..

 किसी  का  मित्र  और  शत्रु  होता  है “

” तुम क्यों व्यर्थ में चिंता करते हो ?..

तुम क्यों भयभीत होते हो ?..

कौन तुम्हे मार सकता है ?..

आत्मा ना कभी जन्म लेती है और ना ही कोई इसे मार सकता है..

यही जीवन का अंतिम सत्य है “

” जब-जब इस धरती पर..

पाप, अहंकार और अधर्म बढ़ेगा “

तो उसका विनाश करने हेतु..और

धर्म की पुन: स्थापना करने हेतु,

मैं बार-बार अवश्य अवतार लेता रहूंगा “

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gita updesh in hindi
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” जो होने वाला है, वो होकर ही रहता है..

और जो नहीं होने वाला, वह कभी नहीं होता..

ऐसा निश्चय, जिनकी बुद्धि में होता है..

उन्हें चिंता कभी नही सताती है “

” जिस तरह प्रकाश की ज्योति,,अँधेरे में चमकती है..

ठीक उसी प्रकार, सत्य भी चमकता है..

इसलिए हमेशा, सत्य की राह पर चलना चाहिए “

” जो हुआ वह अच्छा हुआ..

जों हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है..

जो होगा, वो भी अच्छा ही होगा ..

तुम क्यों चिंता करते हो “

” एक ज्ञानवान व्यक्ति कभी भी..

कामुक सुख में आनंद नहीं लेता “

Gita updesh in hindi

” इतिहास कहता है कि,, कल सुख था,

विज्ञान कहता है कि,, कल सुख होगा,

लेकिन धर्म कहता है कि,,

अगर मन सच्चा और दिल अच्छा हो तो..

हर रोज सुख होगा “



” मैं सभी प्राणियों को एक समान रूप से देखता हूँ..

मेरे लिए ना तो कोई कम प्रिय है और ना ही ज्यादा..

लेकिन, जो मनुष्य मेरी प्रेम-पूर्वक आराधना करते हैं..

वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में सदेव होता हूँ “

” अपने आपको ईश्वर के प्रति समर्पित कर दो..

यही सबसे बड़ा सहारा है..

जो कोई भी इस सहारे को पहचान गया है..

वह डर, चिंता और दुखों से आजाद रहता है “

” इस जीवन में ना कुछ खोता है..

ना व्यर्थ होता है “

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gita updesh in hindi
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” फल की अभिलाषा छोड़कर..

कर्म करने वाला पुरुष ही..

अपने जीवन को सफल बनाता है “

” परमात्मा को प्राप्ति के इच्छुक..

ब्रम्हचर्य का पालन करते है “

” जन्म लेने वाले के लिए ,मृत्यु उतनी ही निश्चित है..

जितना कि, मृत होने वाले के लिए जन्म लेना..

इसलिए जो अपरिहार्य है ,उस पर शोक मत करो “

” वह जो सभी इच्छाएं त्याग देता है..

और (मैं )  और (मेरा ) की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है..

उसे शान्ति प्राप्त होती है “

” मैं  सभी  प्राणियों  के..

  ह्रदय  में  विद्यमान  हूँ “




” वह जो .. मृत्यु  के  समय..

 मुझे  स्मरण  करते  हुए  ..

अपना  शरीर  त्यागता  है..

वह  मेरे  धाम   को प्राप्त  होता  है..

इसमें  कोई  शंशय  नहीं है “

” लोग आपके अपमान के बारे में

हमेशा बात करेंगे “

” सम्मानित व्यक्ति के लिए..

अपमान मृत्यु से भी बुरा है “

Gita updesh in hindi

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gita updesh in hindi
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” धरती पर जिस प्रकार

मौसम में बदलाव आता है..

उसी प्रकार जीवन में भी

सुख-दुख आते जाते रहते है “

” प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए..

गंदगी का ढेर, पत्थर और सोना..

सभी समान हैं “

” कर्म मुझे बांधता नहीं..

क्योंकि..

मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं “

” मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया..

मन से मिटा दो..

फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो “

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gita updesh in hindi
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“हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे,
हरे कृष्णा हरे कृष्णा ,कृष्ण कृष्ण हरे हरे”

आशा करता हूँ की आपको gita updesh in hindi पसंद आये होंगे, और आयेंगे क्यों नहीं , हमारे भगवान श्री कृष्ण ने खुद ,इस मानव जाती के कल्याण के लिए ये उपदेश दिए थे |

धन्यवाद |

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