bholenath ki amar katha-अमर कथा (mahashivratri 2021)

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bholenath ki amar katha
bholenath ki amar katha

Bholenath ki amar katha

हेल्लो दोस्तों, इस बार महाशिवरात्रि 11 मार्च को है अतः आज हम लेकर आये है, भगवान शिव की अमर कथा , जो की भगवान शिव ने सुनानी तो माँ पार्वती को चाही थी लेकिन सुन किसी और ने ली | इस महाशिवरात्रि आप भी यह कथा पढ़े और अपने चाहने वालो में शेयर करे और सुनाये | भोलेनाथ की कावड़ कथा ..

भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी दुखो से छुटकारा मिलता है , भगवान शिव तो भोले-भंडारी है जो थोड़ी पूजा होने में ही खुश हो जाते है , इन्हें मनाना बहुत ही आसान है , यह अपने भक्तो को कभी निराश नहीं करते और उनकी हर एक मनोकामना पूर्ण करते है |

अतः सभी कहते है की “अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का “

तो आइये शुरू करते है :-bholenath ki amar katha



bholenath ki katha in hindi

पौराणिक कथाओ में स्मरण है की एक बार माँ पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से यह प्रश्न किया की ऐसा क्यों की आप अजर अमर है और मुझे हर जन्म के बाद नए सवरूप में आकर ,कठोर तपस्या के बाद आपको प्राप्त करना होता है |

जब मुझे आपको ही प्राप्त करना है तो ये बार-बार जन्म क्यू,ये तपस्या क्यू ? मेरी इतनी कठोर तपस्या क्यू ? और आपके गले (कंठ ) में पड़ी परमुनड माता और आपके अमर होने का रहस्य क्या है ?

महाकाल ने पहले तो माँ पार्वती को यह गूढ़ रहस्य बताना सही नही समझा लेकिन माँ की हठ के आगे एक ना चली | अतः भोलेनाथ शिव को अपनी साधना की अमर कथा जिसे अमर कथा के रूप में भी जाना जाता है ,इसी परम पावन अमरनाथ की गुफा में कही |

भगवान शिव ने माँ पार्वती जी से एकांत एवं गुप्त स्थान पर अमर कथा सुनाने को कहा | जिससे की कोई भी जीव,पशु-पक्षी इस कथा को ना सुन ले | क्योंकि जो भी इस कथा को सुन लेता है, वह अमर हो जाता है |

इस वजह से भगवान शिव माँ पार्वती के साथ गुप्त स्थान की और चल पड़े |

bholenath ji ki amar katha

bholenath ki amar katha
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सबसे पहले भगवान भोलेनाथ शिव ने अपनी सवारी नंदी को पहलगाम में छोड़ दिया , इसीलिए बाबा अमरनाथ की यात्रा पहलगाम से शुरू करने का बोध होता है |

आगे चलकर भगवान शिव ने अपनी जटाओ से चंद्रमा को चंदनवाडी में अलग कर दिया और गंगा जी को पंचतरणी में और कंठ में विराजमान सर्प को शेषनाग पर छोड़ दिया | इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा |

आगे की यात्रा में अगला पड़ाव गणेश टाप पड़ता है , इस जगह पर भगवान शिव ने गणेश जी को भी यहीं छोड़ दिया था | जिसे महागुना का पर्वत भी कहते है |

पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े को भी त्याग दिया था | अतः इस प्रकार भगवान शिव ने जीवनदायिनी पांच तत्वों को भी पीछे छोड़ दिया था |

इसी के साथ माँ पार्वती के साथ एक गुफा में प्रवेश कर गये , कोई मनुष्य,पशु-पक्षी गुफा के अन्दर प्रवेश ना कर सके इसके लिए भगवान शिव ने गुफा के चारो और आग जला दी |

bholenath ki kawad katha

कथा कहने से पहले भगवान शिव ने माँ पार्वती को कहा की कथा सुनाते-सुनाते मेरी आँखे बंद हो जाये तो भी आप हुकार भरती रहना जिससे की मुझे लगे की आप कथा सुन रहे हो |

ऐसा कहकर भगवान शिव ने कथा कहनी शुरू की , लेकिन थोड़ी देर बाद माँ पार्वती को नींद आ गयी |

उसी गुफा में दो कबूतरों का जन्म उसी वक्त हुआ था अतः कबूतरों की आदत होती है की अगर वो किसी बात को सुन लेते है तो उसे दोहराते रहते है , अतः जो हुकार की आवाज माँ पार्वती को करनी थी उनके सो जाने के बाद वो दोनों कबूतर करते रहे |

जिसका भगवान शिव को पता नहीं चला और वो कथा सुनाते रहे | 

जब कथा पूरी हुई और भगवान शिव ने देखा की पार्वती तो सो गयी है , तो इतनी देर से हुकार कोन भर रहा था |

जब उन्होंने चारो तरफ देखा तो वो दोनों कबूतर उन्हें दिख गये |  भगवान शिव को यह देखकर बहुत गुस्सा आया और उन्हें मारने के लिए तत्पर हुए |

bholenath ki amar katha
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Good Morning Quotes

इस पर उन कबूतरों ने कहाँ की हे प्रभु , हमारा जन्म अभी हुआ है और हमने अमर कथा भी सुनी है , अगर आपने हमें मार दिया तो आपकी यह कथा झूटी हो जाएगी |

इस पर भगवान शिव ने उन दोनों को छोड़ दिया और आशीर्वाद भी दिया की तुम दोनों सदेव यहाँ शिव-पार्वती के प्रतीक चिन्ह के रूप में  निवास करोगे |

अतः यह कबूतर का जोड़ा अमर हो गया , माना जाता है की आज भी इन दोनों कबूतरों का दर्शन भक्तजनों को प्राप्त होता है | इस तरह यह कथा अमर कथा की साक्षी हो गयी , और इसका नाम अमरनाथ गुफा पड़ा |

जहाँ गुफा के अन्दर भगवान शिव बर्फ से निर्मित शिवलिंग के रूप में विराजमान है | इस पवित्र गुफा में माँ पार्वती के अलावा गणेश के भी अलग से बर्फ निर्मित प्रतिरूपों के दर्शन किये जा सकते है |

अतः यह थी भगवान भोलेनाथ शिव शंकर की अमर कथा , जिसके कहने और सुनने मात्र से सभी कस्ठो का निवारण हो जाता है |

भगवान शिव आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे |

शिव की शायरी:-

  • ज़िदगी मेरी दाव पर, दाव तेरे हाथ में ,क्या करू में चिंता भोलेनाथ , जब तू है मेरे साथ में |
  • आप पूछ लेना , सुबह और शाम से , दिल धडकता है महादेव के नाम से |
  • मुझे मेरी हाथो की लकीरों पर नहीं , लकीरे बनाने वाले महादेव पर भरोसा है |
  • कण कण में भोलेनाथ आपका वाश है , हर भक्त के लिए आप खाश और और हर भक्त आपके लिए खाश है |
  • स्वर्ग भी तू है और नरक भी तू है | इन दोनों के बिच का फर्क भी तू है |

आशा करता हूँ की आपको यह कथा (bholenath ki amar katha) पसंद आई होगी ,आप हमें कमेंट करके जरुर बताये की आपको यह कथा केसी लगी |

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