सच्ची भक्ति की कहानी-Short story in hindi

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सच्ची भक्ति की कहानी
सच्ची भक्ति की कहानी

हेल्लो दोस्तों, आज हम लेकर आये है ,भक्त और भगवान की सच्ची घटना पर आधारित एक कहानी , जिसमे किस तरह भगवान ने अपने भक्त की जान बचायी और उसकी भक्ति की लाज रखी |

तो आइये शुरू करते है :-सच्ची भक्ति की कहानी

एक बार एक राजा ने भगवान श्री कृष्ण का मंदिर बनवाया और उसमे पूजा-पाठ करने के लिए एक पुजारी को लगा दिया |

पुजारी जी पड़े प्रेम भाव से भगवान की सेवा करने लगे |

भगवान की पूजा-पाठ और सेवा करते हुए पुजारी की उम्र बीत गयी |

राजा रोज वहां दर्शन के लिए आता था, लेकिन इससे पहले वह अपने सेवक के साथ एक फूलो की माला भेजता था |

जिसे वह पुजारी भगवान को पहनाता और जब राजा दर्शन को आते तो आशीर्वाद सवरूप भगवान के गले से उतारकर राजा को पहना देता |

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रोज का यहीं नियम था |

एक दिन राजा किसी कारणवश मंदिर नहीं जा सका |

उसने सेवक के हाथ माला भिजवाई और पुजारी को संदेसा भिजवाया की राजा आज मंदिर नहीं आ पाएंगे |

सेवक माला देकर और संदेसा कहकर चला गया |

पुजारी ने भगवान को माला पहना दी |

थोड़ी देर बाद पुजारी का मन में विचार आया की “मुझे भगवान की सेवा करते हुए आज उम्र बीत गयी है लेकिन मेने आज तक यह माला नहीं पहनी है | सांसो का क्या भरोसा कब रूठ जाये |

भगवान ने आज मुझ पर कृपा करी है तो क्यों ना ये माला आज में ही पहन लू “

भगवान तो सरलता पर ही रिझाते है |


ऐसा सोचकर पुजारी ने वह माला भगवान के गले से उतारकर खुद पहन ली |

लेकिन ये क्या ! बाहर से पुजारी ने आवाज दी की राजा की सवारी मंदिर पहुचने वाली है |

अचानक सेवक की आवाज सुनकर और राजा के ऐसे अचानक आ जाने से  पुजारी जी घबरा गये |

की कही राजा ने मुझे माला पहने देख ली तो क्रोधित होंगे और मुझे दंड देंगे |

एसा सोचकर पुजारी जी ने वह माला अपने गले से निकालकर भगवान को फिर से पहना दी |

और जब राजा मंदिर में आये तो वहीं माला भगवान के गले से निकालकर राजा को पहना दी |

लेकिन जेसे ही राजा ने माला पहनी तो उसमे राजा को एक सफ़ेद बाल दिखाई दिया | जिससे राजा को सारा माजरा समझ आ गया की यह माला पुजारी ने पहले खुद पहनी है और जब में आया तो मुझे पहना दी |

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पुजारी ने छल किया है , यह सोचकर राजा को गुस्सा आया |

राजा ने पुजारी से पूछा की ये सफ़ेद बाल किसका है(चूँकि पुजारी जी भी बूढ़े हो गये थे और उनके बाल भी सफ़ेद थे )

पुजारी ने सोचा की अगर मेने मेरा नाम लिया तो राजा मुझे अवश्य दंड देगा , अतः पुजारी ने कहाँ की ये तो भगवान का बाल है |

इस पर राजा को बहुत गुस्सा आया की पुजारी झूट पर झूट बोल रहा है ,भला कब से मूर्तियों के बाल सफ़ेद होने लगे |

इस पर राजा ने पुजारी से कहा की कल में श्रंगार के समय आऊंगा और देखूंगा की भगवान के बाल काले है या सफ़ेद ,

अगर भगवान के बाल काले निकले तो पुजारी तुझे इस पाप के लिए मृत्यु दंड दिया जायेगा |

राजा हुकुम सुनाकर चला गया |

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राजा के जाते है पुजारी भगवान के सामने रोने लगा ,और विनती करने लगा की “प्रभु में जनता हूँ की मेने आपके सामने झूट बोलने का अपराध किया ,

अपने गले में डाली हुई माला मेने पुनः आपको पहना दी ,

आपकी सेवा करते-करते बुढा हो गया , ये छोटी सी लालसा थी की आपको चढ़ी हुई माला पहनू |

इसी लोभ-लालसा में यह अपराध हुआ”

मेरे प्रभु पहली बार यह लोभ हुआ और विपति आ पड़ी |

हे मेरे नाथ “कृपया आप ही मुझे बचाइए नहीं तो कल राजा मुझे फासी पर चढ़ा देगा |

पुजारी सारी रात रोते-रोते मंदिर में ही सो गया |

सुबह हुई तो राजा आया और भगवान का श्रंगार स्वयं करने के लिए बोला |

पुजारी डर के मारे एक कोने में खड़ा था |

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राजा ने जेसे ही ठाकुर जी का मुकुट हटाया तो आश्चर्य चकित रह गया , क्योकि ठाकुर जी के सभी बाल सफ़ेद थे |

राजा को लगा की पुजारी ने जान बचाने के लिए बालो को सफ़ेद कलर से रंग दिया होगा,

अतः राजा ने बालो की जांच करने के लिए  ठाकुर जी का एक बाल पकड़ कर जोर से खीचा तो वहां से रक्त की धार बहने लगी |

यह सब देखकर राजा घबरा गया और ठाकुर जी भगवान के पैर पकड़ लिए और क्षमा याचना करने लगा |

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तभी मूर्ति से आवाज आई की “ राजा तुमने आज तक मुझे मूर्ति ही समझा , इसीलिए में आज भी तुम्हारे लिए मूर्ति ही हूँ | पुजारी मुझे साक्षात् भगवान समझता है , उसकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए और तुझे समझाने के लिए  मुझे अपने बाल सफ़ेद करने पड़े और रक्त की धार बहानी पड़ी |”

राजा ने भगवान और पुजारी दोनों से माफ़ी मांगी और अपने राजमहल लौट गया |

सिख :-अगर मान लिया तो भगवान और ना मानो तो पाषाण (पत्थर ), अगर मन में सच्ची श्रद्धा हो तो भगवान पत्थर में सप्राण होकर भी भक्त से मिलने आ जाते है |

आशा करता हूँ की आपको ये खुबसूरत कहानी (सच्ची भक्ति की कहानी) बहुत पसंद आई होगी | अगर आपके पास भी है एसी कुछ कहनियाँ तो हमें कमेंट करके जरुर बताये |

धन्यवाद |

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