गांव का छोरा शायरी | देशी लडको पर शायरी

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हेल्लो दोस्तों, आज हम लेकर आये है ,आपके लिए देशी छोरा शायरी ,कहते है की गाँव में रहने का मजा ही अलग होता है | गाँवो में शांति और सुकून है | शहरो में तो एक कमरे में जिन्दगी सिमट सी जाती है लेकिन गाँव में हम जितना खुलकर जीते है , जितना शुद्ध पर्यावरण होता है , वो शहरो में नहीं होता | जितना गाँव का माहोल शुद्ध देशी होता है वेसे भी यहाँ के लोग मन के सच्चे और दिलदार होते है | गाँव के देशी लड़के हमेशा सभी का सम्मान करना जानते है | आज हम ही ऐसे देशी छोरों पर कुछ अनमोल शायरी लेके आये है | जो आपको बहुत पसंद आयेंगे |  तो आइये शुरू करते है गांव का छोरा शायरी |

” हमारी पहचान हमसे ही है,
किसी और से नही,
हम देशी है,
हमें विदेशी बनने का कोई शौक नही.. “

” चर्चे उन्हीं के होते है, जिनके मिजाज कुछ अलग से होते है “

” जब गाँव मे मकान नहीं कच्चे घर हुआ करते थे,
जो गर्मी में ठंडे और सर्दियो में गर्म हुआ करते थे “

” भूल चुका हूं उन लोगों को जिन्हे मैंने भूल से चुन लिया था “

” हम देशी है मैडम,
हमे पिज़्ज़ा बर्गर नहीं
दाल रोटी अच्छी लगती है “

” बादशाह कोई भी हो, जहाँ हम, कदम रख ले, वहा किसी की हुकुमत नहीं चलती “

” मै मटके का पानी प्रिये,
तू बिसलेरी की बोतल प्रिये “

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” मेरे गांव की मिट्टी से भरता है तेरे शहर का पेट,
और तेरे शहर वाले गाँव वालों को गवार कहते है “

” मैं लोगों की तरह, मिलावट नहीं करता, मोहब्बत हो या नफरत जो भी करता हूँ 100% करता हूँ “

गांव का छोरा शायरी

” तुम नई विदेशी मिक्सी हो,
मैं पत्थर का सिलबट्टा हूँ,
तुम AK47 जैसी,
मैं तो एक देसी कट्टा हूँ “

 ” रोज स्टेटस बदलने से जिंन्दगी नहीं बदलती,

जिंदगी को बदलने के लिये एक स्टेटस काफी है “

” जो सुकून नही मिला मुझे विदेशी जूतों में,
वो सुकून मिला मेरी बूढ़ी माँ की हवाई चप्पलों मे “

” हम ना बदलेंगे, वक़्त की रफ़्तार के साथ,

जब भी मिलेंगे अंदाज़ पुराना ही होगा “

” देशी में जो बात है,
वो विदेशी में कहा,
अपनों में जो प्यार है,
वो परायों में कहा “

” देशी व्यक्तित्व है और देशी बातें हैं हमारी,
हिंदी आती है हमें अंग्रेजी कमजोर है हमारी “

” परख ना सकोगे ऐसी शख्सियत है मेरी,

मैं अच्छा सिर्फ उन्हीं के लिए हूँ जो जाने कदर मेरी “

” कुछ भी हो असली सुकून तो गांव में ही मिलता है,
क्योंकि यहां लोग और खाना दोनों असली मिलते हैं “

 ” मेरा Style तू Copy करने की आदत डाल ले,

मेरे से ना बड़ा कोई कलाकार ये तू मान ले “

” अक्सर वही लोग, उठाते है हम पर उंगलिया,

जिनकी हमें छूने की, औकात नहीं होती “

” गांव से हूँ गवार मत समझना,
सुन्दर नही हूँ इतना,
पर दिल का बेकार मत समझना “

” मैं पत्र करता हूँ देशी में,
वो Reply करती है विदेशी में “

” जिन तूफानों में लोगों के झोपड़े उड़ जाते हैं,

उन तूफानों में तो हम कपड़े सुखाते है “

” देसी सूँ , गवार नी,,
माँई-बापू का लाल सूँ ,
किसी पापा की परी का गुलाम नी “

” मंज़िल नहीं मुझे तो राह से मिलना है,
दुनिया के साथ किसे जीना है,
मुझे तो Attitude में जीकर शान से मरना है “

गांव का छोरा शायरी

 

” कुछ ज्यादा बड़ी ख्वाइश नहीं है मेरी रब से,

बस 3-4 लड़कियां मुझे बाबु बाबु बोलने के लिए आपस में लड़ पड़े “

 “यह जो सर पर घमंड का ताज रखते हैं,
सुन लो दुनिया वालों हम गाँव वाले इनके भी
Attitude में बाप लगते है “

खून में शामिल हैं नवाबी मेरे,

मैं किसी हसीना का गुलाम नही हो सकता “

” सुधरी हे तो बस मेरी आदते, वरना मेरे शौक,
वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे है “

” मुँह पर सच बोलने की, आदत हैं मुझे,

इसलिए लोग मुझें, बदतमीज कहते है “

” हम समंदर हैं, हमें खामोश ही रहने दो,
ज़रा मचल गये तो, शहर ले डूबेंगे “

” झुक के बात करने की, आदत बना ले काफी फायदे में रहोगे,

क्यूंकि आज भी आँखे मिला कर बात करने की तेरी औकात नहीं है “

गांव का छोरा शायरी

” जलने लगा है जमाना सारा,
क्योंकि चलने लगा है नाम हमारा “

गांव का छोरा शायरी

” भीड़ में खड़ा होना, मकसद नहीं हैं मेरा,

बल्कि भीड़ जिसके लिए खड़ी हो वो बनना है मुझे “

गांव का छोरा शायरी

” हम तो दुश्मनी भी दुश्मन की औकात देख कर करते है,,
बच्चों को छोड़ देते है और बड़ों को तोड़ देते है “

गांव का छोरा शायरी

” अभी मैं कुछ नहीं हूँ मैंने माना कल को मशहूर हो जाऊं तो ?

कोई रिश्ता मत निकाल लेना “

गांव का छोरा शायरी

” बात लगाव और एहसास की है,
वरना कॉल और मैसेज तो
कम्पनी वाले भी करते है “

गांव का छोरा शायरी

” बाप के सामने अय्याशी, और हमारे सामने बदमाशी,

बेटा भूल कर भी मत करियो “

गांव का छोरा शायरी

” हमे अपनी महफ़िलो में न बुलाया कर मेरे यार,
मुझे तो आज भी फर्स पर बैठ कर खाने की आदत है “

गांव का छोरा शायरी

” मेरे घर वाले बोले सुधर जा पगले

मैंने कहा अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा ?

जिन्हें हमारी मस्ती प्यारी लगाती है “

गांव का छोरा शायरी

” आख़िर तुम भी उस
आइने की तरह ही निकले,
जो भी सामने आया
तुम उसी के हो गए “

गांव का छोरा शायरी

” दुनिया से हमेशा आगे चलो, क्यूंकि पीछे तो दुश्मन भी पड़े है “

गांव का छोरा शायरी

” हम जब तक जिंदा है, तब तक शान से ही जिएंगे “

गांव का छोरा शायरी

” उड़ा देती है नींद कुछ ज़िम्मेदारियां
वरना
देर रात तक जागने वाला
हर इंसान आलसी नही होता “

गांव का छोरा शायरी

” ये मत सोचना की भूल गया होगा,

नाम, चेहरे और औकात सबकी याद है “

गांव का छोरा शायरी

” आपके शहरों में इंसान बसते है,
मेरे गांव में इंसानियत “

गांव का छोरा शायरी

” नही चाहिए किसी का साथ,

बस सिर पर रहे मां बाबा का हाथ “

गांव का छोरा शायरी

” मुसीबतों, ज़िल्लतों से भरा
तू अपने शहर को समझना,
मेरा गाँव तो खजाना है
शुकून-ए-जन्नत से भरा “

गांव का छोरा शायरी

” सवाल आप हो तो जवाब हम भी है,

आप ईट हो तो जनाब पत्थर हम भी है “

” चाहे कितने ही महँगे होटलों में खाना खा लो,
मगर जो स्वाद चूल्हें की रोटियों में है वो और कहीं नही “

गांव का छोरा शायरी

” गाँव और शहर के लोगों मे बस उतना
ही फर्क होता है जितना कि
धरती और गमले
मे उगे पौधौ मे होता है “

आशा करता हूँ की आपको यह शायरियां “गांव का छोरा शायरी बहुत पसंद आएगी | इन्हें आप अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे और अपने किमती विचार हमारे साथ कमेंट बॉक्स में शेयर करे | |

धन्यवाद |

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